रविवार, 29 मार्च 2009

आज के दौर में अपनी भूमिका

आज प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ एक दुसरे के प्रति प्रतिबद्धता का समय है । हमें अपने आपसी झगड़े मिटा कर साथ काम करना है। शायद तभी हम ज्यादा उर्जा के साथ काम कर पायेंगे बदलते परिदृश्य के साथ वक्त की मांग है की हम एक दुसरे के साथ अपनी बात को रख कर देखें ना की केवल और केवल अपना स्वार्थ ही देखें।
VAS v/s AVFO के झगड़े को ख़त्म करना बेहद ज़रूरी है.यह हमारी रचनात्मकता को ख़त्म कर रहा है। शर्त केवल यह है की दोनों आपस में बेहद इमानदारी से एक दुसरे के ओब्जेक्शन्स को ठंडे दिमाग से महसूस करे और एक दुसरे के लिए दोनों के हितों को पूरे ध्यान में रख कोई बीच का रास्ता निकालें .

बुधवार, 27 अगस्त 2008

एक निवेदन

प्रिय मित्रों ,
राजेंद्र मालवीय का प्यार भरा नमस्कार .....!
मित्रों मैं इस ब्लॉग के बनाने का यह काम पिछले ४ सालों से करना चाहता था ,मगर हमारे माननीय अध्यक्ष महोदय श्री उपाध्यायजी से कई बार संपर्क करने के बाद भी उन्होंने कोई रूचि नही ली ,अभी पिछली बार रक्षाबंधन पर उनसे उनके निवास पर मुलाकात हुई ,फिर वो व्यस्त थे।कहा की इस समस्या के बाद ही कुछ कर पायेंगे। मैंने कहा की आप बस मुझे जानकारी उपलब्ध करवा दें । बाकी का काम मैं ख़ुद ही कर दूंगा मगर फिर वही बात हुई जो आज तक होती आई थी । हमारे साथी विनोद सिंह ,जो की स्टेट वेट होस्पिटल ,भोपाल में पदस्थ हैं ,मेरे साथ मैं थे। अब मित्रों आप ही बताएं मुझे क्या करना चाहिए ?